सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Bachelors Kitchen : Paneer Sweet Dish

Courtesy_Social Media
घर से दूर रहने वालों के लिए स्वादिष्ठ और बढ़िया खाने की तलब हमेशा रहती है। अगर कुछ मीठा खाना हो तो बाहर से मंगाने के अलावा कोई विकल्प नजर नहीं आता। बैचलर लड़कों के लिए पहाड़ सा काम नजर आता है, कुछ मीठा सा अपने हाथों से बना लेना..। अगर आप इस परेशानी के आगे हार मान जाते हैं और बाहर का खाते हैं.. तो आज हम आपको एक ऐसी डिश बताने जा रहे हैं जो मिनटों में तैयार होगी और आपको मुंह में मिठास घोल देगी। जी, हां यह एक स्वीट डिश है, जो कभी भी किसी भी मौके पर बनाई जा सकती है। चाहे दोस्तों के साथ पार्टी का मूड हो या अकेलेपन में कुछ मीठा खिलाने का या अपनी गर्लफ्रेंड को इम्प्रेस करने का.. चलिए आपको बताते हैं कि इसे बनाना कैसे हैं।

पनीर का खुरमा बनाने के लिए हमें चाहिए - पनीर 100 ग्राम और और 100 ग्राम शक्कर पिसी हुई। पिसी हुई शक्कर आपको बाजार से मिल जाएगी.. टेंशन नॉट 

अगर पनीर बहुत देर से फ्रीज में रखा हो तो उसे तीन चार मिनट के लिए थोड़े से गुनगुने पानी में रखे दें। फिर उसे निकालकर छोटे-छोटे मन चाहे आकार में काट लीजिए। 

पैन को गरम कीजिए और मद्धिम आंच पर भूनिए। पिसी हुई शक्कर को एक प्लेट में फैला लीजिए और जब पनीर के टुकडे हल्के-हल्के लाल होने लगे तो उसे निकाल कर जिस प्लेट में पिसी हुई शक्कर रखी है उसी में रख लें और फिर दोनों को आपस में मिला दें। कुछ देर में हिलाने और चलाने से पिसी हुई शक्कर पनीर में लिपट जाएगी.. इसे कोटिंग कहते हैं। लीजिए आपकी डिश तैयार है। 

जिन लोगों को शुगर है। वो मार्केट से अपने लिए दूसरे तरीके वाली शुगर खरीद सकते हैं। 

अगर आपको कई लोगों के लिए बनाना है, तो पनीर और शक्कर की मात्रा बढ़ा लें। ये डिश पौष्टिक भी है और स्वादिष्ठ भी.. जिन लोगों को पनीर पसंद है उनके लिए मुंह मांगी मुराद सी है। 

शुक्रिया। 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"एक हथौड़े वाला घर में और हुआ "

केदारनाथ अग्रवाल की कविता एक हथौड़े वाला घर में और हुआ! हाथी-सा बलवान, जहाजी हाथों वाला और हुआ! सूरज-सा इंसान तरेरी आँखों वाला और हुआ! एक हथौड़े वाला घर में और हुआ! माता रही विचार, अंधेरा हरने वाला और हुआ!! दादा रहे निहार, सबेरा करने वाला और हुआ।। एक हथौड़े वाला घर में और हुआ! जनता रही पुकार सलामत लाने वाला और हुआ सुन ले री सरकार कयामत ढाने वाला और हुआ!! एक हथौड़े वाला घर में और हुआ!

रख दो मेरे होठों पर अपने होंठ

Image_Nandlal मुझे तलब लगी है तुम्हारे होठों की नमी चखने की पर इस पुरवाई में तुम अपने कमरे में कैद हो रात के तीसरे पहर मेरी आँखों में नींद के बजाय तुम्हारा चेहरा है मैं अपना दर्द कहूं तो कैसे मैंने तुम्हें इत्तला नहीं की है लेकिन तुम्हें आभास तो है एकतरफा बह रही पुरवाई से सूख रहा गला तुम्हें कैसे फोन करूँ तुम्हारी नींद में खलल कैसे डालूं तुम्हारी सांसें गिनना चाहूं अभी तुम्हारे हाथों की नमी में सोना चाहूं तुम्हें कैसे जगाऊँ नींद के एक्सटेंशन में मैं तन्हा जगा हूँ तुम्हारे फोन नम्बर का उच्चारण करते गले में पड़ रहा है सूखा जैसे मार्च में ही तप रहा जेठ का सूरज पड़पड़ा रहे होंठ, उधड़ रही चमड़ी सोचता हूँ दौड़ पड़ूं तुम्हारी सड़क की ओर और तुम भी चली आओ मॉर्निंग वॉक करते और रख दो मेरे होठों पर अपने होंठ ताकि तर जाये मेरा गला ठंडी पड़ जाए मेरी रूह शुकराने में मैं चूम लूं तुम्हारी पलकें और भर लूं तुम्हें अँकवार में जैसे एक दूसरे से चिपट जाती हैं बन्द आंख की पलकें

कौड़ियों के भाव बिक रही प्याज: जो रो नहीं पाएंगे वो झूल जाएंगे फंदे से!

Courtesy_Onion_Google images उत्तर भारत में इस समय प्याज की फसल खेतों से मंडी तक पहुंच रही है, लेकिन किसान को कीमत नहीं मिल रही। तीन से चार रुपये किलो का भाव जा रहा है। किसान को दाम नहीं मिल रहा है। वो हताश है, लेकिन सोचिए कि कौन हैं ये लोग जो टन के टन अभी प्याज खरीद रहे हैं ? ये कटु सत्य है कि जो खरीद रहे हैं उनकी चांदी है। बहुत सारे किसान ऐसे हैं जो प्याज को स्टोर करने की स्थिति में नहीं है। उनके पास पैसा नहीं है। फसल उगाने के लिए जो कर्ज लिया था उसे भरना है, ऐसे में उसे पैसा चाहिए, लेकिन प्याज की कीमत नहीं मिल पा रही है। मंडी में प्याज की कीमत तीन से चार रुपया प्रति किलो।  दूसरी ओर बिचौलिये भी सस्ते में प्याज खरीद कर स्टोर करेंगे और जैसे ही उत्तर भारत के राज्यों में बरसात शुरू होगी, प्याज की कीमत चढ़नी शुरू होगी। और इतनी रफ्तार से चढ़ेगी कि आम आदमी कहेगा... ‘ प्याज हमेशा से ही महंगी थी ’ । उसे पता नहीं चलेगा कि इसी प्याज को किसान मई के महीने में 3 रुपया किलो के हिसाब से बेचकर हताश है।  वो बिचौलिए जो प्याज को कौड़ियों के दाम खरीदे हैं। बरसात में 80 से 100...