संदेश

अप्रैल, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तुम्हें खो देने का डर

चित्र
Image_Nandlal सोचता हूं कभी समुद्र में गहरे उतर जाऊं शांत शीतल जल में नीम अंधेरे दुनिया से छुप के तुम्हें प्यार करूँ तुम्हें निहारता रहूं तुम्हारी जुल्फों से खेलूं तुम्हारा आलिंगन करूँ और तुम्हारे माथे को चूम लूं फिर सहसा डर जाता हूँ गर समुद्र की तलहटी में उतरकर तैरना भूल गया तो क्या होगा? कहीं अपनी नाकामी से मैं तुम्हें खो ना दूं कहीं मेरी लाचारी तुम्हारी बाधा न बन जाये इस प्यार में गर लहरों की जाल में सांसें उलझ गयीं डरता हूँ समुद्र की गहराइयों में उतरने से डरता हूँ तुमसे प्यार का इजहार करने से

तुम्हें सपने में देखना

चित्र
Image_Nandlal मैं डरता हूँ तुम्हारे साथ चलते हुए डरता हूँ कि कहीं छू न जायेबदन मेरा और चौंक उठो तुम कहीं बुरा न लगे तुम्हें मेरी बातें तुमसे गुफ़्तगू में सिहरता हूं कुछ कहना चाहता हूं तुमसे लेकिन, तुम्हें खोने से डरती हैं साँसें यूं खामोशियाँ कुछ कहती हैं लेकिन बोलने से डरता हूँ कहने को बहुत है मगर कहीं बुरा न मान जाओ तुम तुम्हें खोने से डरता हूँ तुम सपने में आती हो हर रोज बेनागा, मैं आंखें खोलने से डरता हूँ हर रात कहानी लिखता हूँ लेकिन बताने से डरता हूँ चूम लेता हूँ पलकें तुम्हारी लेकिन होंठो की गुस्ताख़ी होंठो ने न मानी लिखता हूँ हर रात की कहानी