आप मुझसे कुछ भी करवा लीजिए। मुझे बैठने से खासा दिक्कत है। मैं लगातार सोचता रहता हूं। और कुछ ना कुछ करता रहता हूं। हालांकि इससे कुछ लोगों को चिढ़ भी होती है। जब मैं पहली नौकरी कर रहा था सीएनबी न्यूज में तो ऑफिस तीन बजे का था। मैं दस पन्द्रह मिनट पहले पहुंच जाता था। और जाते ही सीनियर लोगों को नमस्ते बोलता था , वो लोग सुबह वाली शिफ्ट में थे। और वाइंड अप कर रहे होते तो काम बताने लगते। और मैं शुरू हो जाता। मेरे साथी कहते (जो लोग हमारे साथ कैंपस प्लेसमेंट में गए थे) कि चलो चाय पीने तो मैं नहीं जाता , कहता कि यार काम बहुत है। वे लोग नाराज होते और कहते कि ये नहीं जाएगा चलो हम लोग चाय पीने चलते हैं। कहने का मतलब है कि मैं जो करने गया हूं और जो करने जा रहा हूं उसमें देरी बर्दाश्त नहीं है। ऐसा नहीं है कि मुझे काम के दौरान पीना और खाना बर्दाश्त नहीं है। लेकिन काम मेरी प्राथमिकता है। हम रिजल्ट की तरफ बढ़ रहे हैं। काम खत्म होने वाला है। तब मैं रिलैक्स हो जाता हूं और चाय पीता हूं , खाना खाता हूं। दोस्तों से मिल आता हूं और सब कुछ करता हूं। मैं वो आदमी हूं जो प्रचार के झांसे में नहीं आता। मैं मं...
गंगा का पानी हूं। बहता रहता हूं