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JULY KI EK RAT KE BAD

21वीं सदी की प्रेम कहानियों को उलट के यानि आखिर से पढ़ना शुरू करो, तुम पाओगे कि हर कहानी का अंत सुखद है।
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वो लिखता कम, काटता ज्यादा है।
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लड़का: तुमसे बात करने में कोई फायदा नहीं है शायद!
लड़की: फायदा सोच के आए थे? बनिए हो गए हो?
लड़का: चलें ?
लड़की: इसी में फायदा लग रहा होगा?
लड़का: ऎसा तो नहीं है!
लड़की: जाने दो खैर, ऑय विल पे फॉर कॉफी, ये नुकसान मैं भुगत लूंगी, तुम इतने फायदे में रहो!
(जुलाई की एक रात)
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"एक दिन में पहचान तो नहीं बदल जाती, रिश्ते तो खत्म नहीं हो जाते"

(जुलाई की एक रात "बीतने" के बाद यही याद रहा बस)
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...आजकल की कहानियां करण जौहर की फिल्मों की तरह डिजायनर ज्यादा है, कथ्य के मामले बेहद कमजोर।
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पहली बारिश के बाद तपती धरती से उठी सोंधी सी महक.. मादा गंध की तरह होती है, जब वो तुम्हारी बाजुओं में अटकी हो और तुम्हारा सिर उसके सीने में धंसा हो.. महसूस करना.. ये गंध तुममें लिपटी हुई होगी"
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दोस्तों के साथ या फिर ऑफिस में, सार्वजनिक जगहों पर तुम मुझसे मिलते हो.. लेकिन क्या वाकई? बातें करते हो, साथ में समय बिताते हो.. लेकिन कभी भी तुम मुझसे वास्तविक अर्थो में मिल पाते हो क्या? .. हो सकता है तुम्हारा जवाब हां में हो.. लेकिन तुम्हें नहीं मालूम कि तुम हमेशा एक अभिनेता से मिलते हो, जो घटनाओं और जरूरतों के हिसाब से अभिनय करता है। मुझसे मिलना है तो मिलो नहीं, मुझे देखो.. जब मैं अकेले होता हूं.. तन्हा होता हूं। तुम मुझे जान पाओगे वास्तविक अर्थो में कि मैं क्या हूं। इसलिए अगर तुम सोचते हो कि तुम मुझे जानते हो तो ये तुम्हारी गलतफहमी है। जब तक तुम मुझे देख "तन्हा" देख ना लो..
(क्या तुमने मुझे "तन्हा" देखा है?)
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मैं जानता हूं कि मेरे प्रति तुम्हारा कोई कमिटमेंट नहीं है। लेकिन जब भी हम साथ होते है, चाहे वो बोर्ड मीटिंग हो या सामान्य, लिफ्ट हो या पिकनिक पर जाती बस की सीट.. या फिर चौराहे से गुजरती कार में तुम्हें खिलखिलाते देखना.. ये सब मेरे लिए प्यार में जीना है। ये अलग बात है कि तुम्हें इस बात का एहसास नहीं है या नहीं। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। प्यार तो मैं करता हूं तुमसे बिना बताएं।

10-01-2014

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