सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Controversy is Good for us: Gaurav Panjvani कंट्रोवर्सी होगी तो यार, अच्छा ही होगा

कंट्रोवर्सी होगी तो यार, अच्छा ही होगा। फिल्म का प्रॉफिट बढ़ेगा। अमृतसर में हमें लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों ने कहा कि यह फिल्म हमारी भारतीय संस्कृति के खिलाफ हैं। सेकंड मैरिज डॉट कॉम फिल्म के निर्देशक गौरव पंजवानी खुलकर बोलते हैं। शनिवार को अपनी फिल्म के प्रमोशन कार्यक्रम के लिए वे जयपुर में थे।

दैनिक भास्कर डॉट कॉम के साथ एक विशेष इंटरव्यू में गौरव ने कहा कि यह फिल्म दो पैरलर फैमिली पर बेस्ड हैं। जिसमें एक बेटा अपने पिता को और एक बेटी अपनी मां को दूसरी शादी की सलाह देते है। दोनों यंगस्टर्स मिलते है और पैरेंट्स की शादी आपस में करवाने को तैयार हो जाते हैं। लेकिन पैरेंट्स को मनाने के चक्कर में उनमें प्यार हो जाता हैं। मां पिता के एक होने पर दोनों यंगस्टर्स भाई बहन कहलाते हैं। लेकिन उनका प्यार भारतीय संस्कृति के आड़े आ जाता हैं। अमृतसर में लोगों ने इसी का विरोध किया।

भारतीय संस्कृति की ऊंची दीवारों को लांघने की कोशिश करने वाले गौरव सेकंड मैरिज डॉट कॉम से पहले फेसपैक, एक्जाम फोबिया और कॉफी मेरी जान जैसी असरदार डॉक्यूमेंट्री फिल्मों से अच्छी खासी पहचान बटोर चुके हैं। गौरव ने कहा, छोटे बजट की फिल्म बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण हैं और जब वह आपकी पहली कॉमर्शियल फिल्म हो। सब कुछ मैनेज करना आसान नहीं था। साफ कहूं तो मेरे सारे फ्यूचर प्रोजेक्ट इस फिल्म पर टिके हुए हैं।

उन्होंने ने कहा कि हाल फिलहाल आई तमाम छोटे बजट की फिल्मों से उनकी फिल्म बेहतर हैं। प्रचार, मार्केटिंग सब पर फोकस कर रहे हैं। जिसका हमें बेहतर रेस्पांस मिल रहा हैं। फिल्म की शूटिंग गुडग़ांव, जयपुर और सोनागांव में हुई हैं। सेकंड मैरिज डॉटकॉम 10 अगस्त को रिलीज हो रही हैं।

जयपुर के रहने वाले गौरव फिल्म को लेकर नम्ब फील कर रहे हैं। यानि ना ही ज्यादा उत्साहित है और ना ही नर्वस। लेकिन उन्हें दस तारीख का इंतजार हैं। वे आगे जोड़ते हैं कि इस फिल्म को पहले डॉक्यूमेंट्री की तरह बनाई थी। लेकिन बाद में प्रोड्यूसर के कहने पर इसे एक कॉमर्शियल फिल्म के रुप में कन्वर्ट कर दिया। लेकिन इसका फैसला ऑडियंस करेगी कि हम अपने प्रयास में कितना कामयाब रहे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"एक हथौड़े वाला घर में और हुआ "

केदारनाथ अग्रवाल की कविता एक हथौड़े वाला घर में और हुआ! हाथी-सा बलवान, जहाजी हाथों वाला और हुआ! सूरज-सा इंसान तरेरी आँखों वाला और हुआ! एक हथौड़े वाला घर में और हुआ! माता रही विचार, अंधेरा हरने वाला और हुआ!! दादा रहे निहार, सबेरा करने वाला और हुआ।। एक हथौड़े वाला घर में और हुआ! जनता रही पुकार सलामत लाने वाला और हुआ सुन ले री सरकार कयामत ढाने वाला और हुआ!! एक हथौड़े वाला घर में और हुआ!

रख दो मेरे होठों पर अपने होंठ

Image_Nandlal मुझे तलब लगी है तुम्हारे होठों की नमी चखने की पर इस पुरवाई में तुम अपने कमरे में कैद हो रात के तीसरे पहर मेरी आँखों में नींद के बजाय तुम्हारा चेहरा है मैं अपना दर्द कहूं तो कैसे मैंने तुम्हें इत्तला नहीं की है लेकिन तुम्हें आभास तो है एकतरफा बह रही पुरवाई से सूख रहा गला तुम्हें कैसे फोन करूँ तुम्हारी नींद में खलल कैसे डालूं तुम्हारी सांसें गिनना चाहूं अभी तुम्हारे हाथों की नमी में सोना चाहूं तुम्हें कैसे जगाऊँ नींद के एक्सटेंशन में मैं तन्हा जगा हूँ तुम्हारे फोन नम्बर का उच्चारण करते गले में पड़ रहा है सूखा जैसे मार्च में ही तप रहा जेठ का सूरज पड़पड़ा रहे होंठ, उधड़ रही चमड़ी सोचता हूँ दौड़ पड़ूं तुम्हारी सड़क की ओर और तुम भी चली आओ मॉर्निंग वॉक करते और रख दो मेरे होठों पर अपने होंठ ताकि तर जाये मेरा गला ठंडी पड़ जाए मेरी रूह शुकराने में मैं चूम लूं तुम्हारी पलकें और भर लूं तुम्हें अँकवार में जैसे एक दूसरे से चिपट जाती हैं बन्द आंख की पलकें

कौड़ियों के भाव बिक रही प्याज: जो रो नहीं पाएंगे वो झूल जाएंगे फंदे से!

Courtesy_Onion_Google images उत्तर भारत में इस समय प्याज की फसल खेतों से मंडी तक पहुंच रही है, लेकिन किसान को कीमत नहीं मिल रही। तीन से चार रुपये किलो का भाव जा रहा है। किसान को दाम नहीं मिल रहा है। वो हताश है, लेकिन सोचिए कि कौन हैं ये लोग जो टन के टन अभी प्याज खरीद रहे हैं ? ये कटु सत्य है कि जो खरीद रहे हैं उनकी चांदी है। बहुत सारे किसान ऐसे हैं जो प्याज को स्टोर करने की स्थिति में नहीं है। उनके पास पैसा नहीं है। फसल उगाने के लिए जो कर्ज लिया था उसे भरना है, ऐसे में उसे पैसा चाहिए, लेकिन प्याज की कीमत नहीं मिल पा रही है। मंडी में प्याज की कीमत तीन से चार रुपया प्रति किलो।  दूसरी ओर बिचौलिये भी सस्ते में प्याज खरीद कर स्टोर करेंगे और जैसे ही उत्तर भारत के राज्यों में बरसात शुरू होगी, प्याज की कीमत चढ़नी शुरू होगी। और इतनी रफ्तार से चढ़ेगी कि आम आदमी कहेगा... ‘ प्याज हमेशा से ही महंगी थी ’ । उसे पता नहीं चलेगा कि इसी प्याज को किसान मई के महीने में 3 रुपया किलो के हिसाब से बेचकर हताश है।  वो बिचौलिए जो प्याज को कौड़ियों के दाम खरीदे हैं। बरसात में 80 से 100...