Short Story उफ्फ़

मुझे तुम्हारी आवाज से प्यार है। मैं जानता हूं कि तुम मुझे नापसंद करती हो। लेकिन तुम्हारी आवाज बहुत मासूम और दिल की अच्छी है। वह तुम्हारी तरह मुझे देखकर नफरत से उफ्फ़ नहीं करती हैं। हां, जब खामोश हो जाती हो तो वह तुम्हारे उफ्फ़ करने का इंतजार करती है। ताकि हल्के से खुले तुम्हारे लबों से निकलकर वह मेरे सीने से लिपट जाएं और तुम ये फैसला ना कर सको कि तुम्हें मुझसे नफरत करनी है या अपने ही उफ्फ़ से ?

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"एक हथौड़े वाला घर में और हुआ "

बुक रिव्यू: मुर्गीखाने में रुदन को ढांपने खातिर गीत गाती कठपुतलियां

Vande Bharat Express : A Journey to Varanasi