हर शाम तेरी उम्मीद में.
दिया जलाते है..
शाम ढलते, मेरी नजरें.
तुम्हें ढूंढ़ती हर महफिल में..
मेरी रातें कट जाती है.
तेरे शहर की गलियों में..
लेकिन तुमसे मिलने की उम्मीद.
दिये की हर लौ में नजर आती है.....
गंगा का पानी हूं। बहता रहता हूं
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