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"ek mulakat" - "sunil kapoor se"

सेलेक्ट प्रकाशन से आए सुनील कपूर से हमने बात क़ि जो एक लम्बे समय से बुक प्रदर्शनियों  में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे है , आइये जानते है कैसा रहा उनका अनुभव..
प्रश्न-भारतीय जनसंचार संस्थान के इस पहले बुक फेयर के प्रति लोगों का रुझान कैसा रहा है ?
उतर-अच्छा है, ज्यादातर लोग छात्र ही है,टेक्स्ट बुक और कोर्स क़ि किताबों के प्रति लोगों का रुझान आमतौर पर देखा जाता है, लेकिन यहाँ हर तरह क़ि किताबों क़ि मांग है और लोगों क़ि दिलचस्पी भी दिख रही है,
प्रश्न- एक मीडिया संस्थान क़ि बुक प्रदर्शनी में पहली बार आकर कैसा लगा ? 
उतर- देखिये इसके बारे में मै कुछ नहीं कह सकता,क्यों क़ि ऐसी जगह हम पहली बार आये है, लेकिन अच्छा है,
प्रश्न - ई- बुक के समय में बुक फेयर का आयोजन और किताबों क़ि बिक्री के उपर क्या प्रभाव पड़ा है ?
ऊतर- जी , बिलकुल इन्टरनेट ने लोगों को खासा प्रभावित किया है, जिनमे युवाओं क़ि संख्या काफी है, लेकिन आज भी बुक प्रदर्शनियों का आयोजन लगातार हों रहा है, किताबों के प्रति लोगों क़ि दिलचस्पी थोड़ी कम देखने को मिल रही है, लेकिन यही युवा जब तीस क़ि उम्र के हों जायेगें तब इन्हें किताबों क़ि जरूरत महसूस होगी, क्यों क़ि आज युवाओं को इन्टरनेट पर सब कुछ मिल रहा है,
प्रश्न- आज के समय में किस तरह के लेखकों क़ि मांग ज्यादा है ?
ऊतर- देखिये, किताबों का महत्व  कभी कम नहीं होता, हाँ समय के हिसाब से लेखकों क़ि मांग घटती बढती रहती है
प्रश्न - कौन- कौन से लेखकों क़ि मांग आज ज्यादा है ?
ऊतर - रामचंद्र गुहा क़ि किताबें अच्छी खासी बिक रही है, इतना समझ लीजिये क़ि जो पब्लिशर उनकी किताबें छपता है उसकी पूरी बिकवाली रहती है, हिंदुस्तान में ऐसे लेखकों क़ि संख्या उनकी बराबरी में कम है,
प्रश्न - आप के स्टाल पर हिंदी क़ि किताबों क़ि कमी दिख रहीं है ?
ऊतर - देखिये, हमारा पब्लिशर फारेनर  है इसलिए हम हिंदी किताबें कम रखते है, क्योंकि आज सब कुछ मार्केट के हिसाब से तय होता है, यही कारण है क़ि मार्केट में अंग्रेजी का बोलबाला है,
प्रश्न - तो , क्या आने वाले समय में हिंदी का लेवल कम हों सकता है ?
ऊतर - जी नहीं , हिंदी का लेवल कम तो नहीं होगा, लेकिन इसके लिए काफी प्रयास करने होंगे, तकनीक और मीडिया का खासा प्रभाव है अंग्रेजी को स्थापित करने में..    

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