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मेरे कारनामों में तुम खुबसूरत हो

मेरे कारनामों में तुम खुबसूरत हो
नए ज़माने की मिसाल हो
सांचे में ढली मूरत हो,

कोई करे कल्पना हुस्न क़ि
तो वो बस तुम हो ,
किसी क़ि यादों में बसने वाली नाजनीन तुम हो
एक युवा के सपनों में आने वाली हसीं तुम हो
गुलशन में खिलने वाली हर कली, सिर्फ तुम हो
फिजां में बिखरने वाली महक भी तुम हो

ये क्या है, हर नाचीज़ तुम हो,
तुम हो तो रंगत है,
रंगत क़ि जरूरत हर मौसम को है
हर हुस्न को है, ये हर नौजवान क़ि जरूरत है
जीवन का चरम भी तुम हो, उम्र का शिखर भी तुम हो

प्यार का मौसम भी तुम हो,
तुम तो बस जवान हों, बुढ़ापे क़ि जलन हो
बुढ़ापे से पहले, तुम मेरी जवानी हो.

आमीन.

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रख दो मेरे होठों पर अपने होंठ

Image_Nandlal मुझे तलब लगी है तुम्हारे होठों की नमी चखने की पर इस पुरवाई में तुम अपने कमरे में कैद हो रात के तीसरे पहर मेरी आँखों में नींद के बजाय तुम्हारा चेहरा है मैं अपना दर्द कहूं तो कैसे मैंने तुम्हें इत्तला नहीं की है लेकिन तुम्हें आभास तो है एकतरफा बह रही पुरवाई से सूख रहा गला तुम्हें कैसे फोन करूँ तुम्हारी नींद में खलल कैसे डालूं तुम्हारी सांसें गिनना चाहूं अभी तुम्हारे हाथों की नमी में सोना चाहूं तुम्हें कैसे जगाऊँ नींद के एक्सटेंशन में मैं तन्हा जगा हूँ तुम्हारे फोन नम्बर का उच्चारण करते गले में पड़ रहा है सूखा जैसे मार्च में ही तप रहा जेठ का सूरज पड़पड़ा रहे होंठ, उधड़ रही चमड़ी सोचता हूँ दौड़ पड़ूं तुम्हारी सड़क की ओर और तुम भी चली आओ मॉर्निंग वॉक करते और रख दो मेरे होठों पर अपने होंठ ताकि तर जाये मेरा गला ठंडी पड़ जाए मेरी रूह शुकराने में मैं चूम लूं तुम्हारी पलकें और भर लूं तुम्हें अँकवार में जैसे एक दूसरे से चिपट जाती हैं बन्द आंख की पलकें

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